Child Development And Pedagogy for Teaching Entrance exams

Child Development and Pedagogy for Supertet
बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र

Important Child Development and Pedagogy Oneliner Facts

=>मनोविज्ञान के जनक = विलियम जेम्स
=>आधुनिक मनोविज्ञान के जनक=विलियम जेम्स
=>प्रकार्यवाद साम्प्रदाय के जनक=विलियम जेम्स
=>आत्म सम्प्रत्यय की अवधारणा= विलियम जेम्स
=>शिक्षा मनोविज्ञान के जनक=थार्नडाइक
=>प्रयास एवं त्रुटिसिद्धांत= थार्नडाइक
=>प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत = थार्नडाइक
=>संयोजनवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक
=>उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत = थार्नडाइक
=>S-R थ्योरी के जन्मदाता= थार्नडाइक
=>अधिगम का बन्ध सिद्धांत = थार्नडाइक
=>संबंधवाद का सिद्धांत= थार्नडाइक
=>प्रशिक्षण अंतरण का सर्वसम अवयव का सिद्धांत = थार्नडाइक
=>बहु खंड बुद्धि का सिद्धांत= थार्नडाइक
=> बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण के प्रतिपादक = बिने एवं साइमन
=>बुद्धि परीक्षणों के जन्मदाता =बिने
=>एक खंड बुद्धि का सिद्धांत =बिने
=>दो खंड बुद्धि का सिद्धांत =स्पीयरमैन
=>तीन खंड बुद्धि का सिद्धांत=स्पीयरमैन
=>सामान्य व विशिष्ट तत्वों के सिद्धांत के प्रतिपादक = स्पीयरमैन
=>बुद्धिका द्वय शक्ति का सिद्धांत = स्पीयरमैन
=>त्रि-आयामबुद्धि का सिद्धांत= गिलफोर्ड
=>बुद्धि संरचना का सिद्धांत=गिलफोर्ड
=>समूह खंड बुद्धि का सिद्धांत =थर्स्टन
=>युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि के प्रतिपादक= थर्स्टन
=>क्रमबद्ध अंतराल विधि के प्रतिपादक= थर्स्टन
=>समदृष्टि अन्तर विधि के प्रतिपादक = थर्स्टन व चेव
=>न्यादर्श या प्रतिदर्श(वर्ग घटक) बुद्धि का सिद्धांत= थॉमसन
=>पदानुक्रमिक(क्रमिक महत्व) बुद्धि का सिद्धांत=बर्ट एवं वर्नन
=>तरल-ठोस बुद्धि का सिद्धांत = आर. बी. केटल
=>प्रतिकारक (विशेषक) सिद्धांत के प्रतिपादक =आर. बी. केटल
=>बुद्धि 'क' और बुद्धि'ख' का सिद्धांत = हैब
=>बुद्धि इकाई का सिद्धांत= स्टर्न एवं जॉनसन
=>बुद्धि लब्धि ज्ञात करने के सुत्र के प्रतिपादक = विलियम स्टर्न
=>संरचनावाद साम्प्रदाय के जनक = विलियम वुण्ट
=>प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक = विलियम वुण्ट
=>विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादक= जीन पियाजे
=>संज्ञानात्मक विकास कासिद्धांत= जीन पियाजे
=>मूलप्रवृत्तियोंके सिद्धांत के जन्मदाता = विलियम मैक्डूगल
=>हार्मिक का सिध्दान्त= विलियम मैक्डूगल
=>मनोविज्ञान को मन मस्तिष्क का विज्ञान=पोंपोलॉजी
=>क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिध्दान्त = स्किनर
=>सक्रिय अनुबंधन का सिध्दान्त= स्किनर
=>अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत = इवान पेट्रोविच पावलव
=>संबंध प्रत्यावर्तन का सिद्धांत= इवान पेट्रोविच पावलव
=>शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत=इवान पेट्रोविच पावलव
=>प्रतिस्थापक का सिद्धांत = इवान पेट्रोविच पावलव
=>प्रबलन(पुनर्बलन)का सिद्धांत= सी. एल. हल
=>व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत = सी. एल. हल
=>सबलीकरण का सिद्धांत= सी. एल. हल
=>संपोषक का सिद्धांत= सी. एल. हल
=>चालक / अंतर्नोद(प्रणोद) का सिद्धांत= सी. एल. हल
=>अधिगम का सूक्ष्म सिद्धान्त= कोहलर
=>सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत = कोहलर, वर्दीमर, कोफ्का
=>गेस्टाल्टवाद सम्प्रदाय के जनक= कोहलर, वर्दीमर, कोफ्का
=>क्षेत्रीय सिद्धांत= लेविन
=>तलरूप का सिद्धांत= लेविन
=>समूह गतिशीलता सम्प्रत्यय के प्रतिपादक = लेविन
=>सामीप्य संबंधवाद का सिद्धांत= गुथरी
=>साईन(चिह्न) का सिद्धांत = टॉलमैन
=>सम्भावना सिद्धांत के प्रतिपादक= टॉलमैन
=>अग्रिम संगठक प्रतिमान के प्रतिपादक= डेविड आसुबेल
=>भाषायी सापेक्षता प्राक्कल्पना के प्रतिपादक = व्हार्फ
=>मनोविज्ञान के व्यवहारवादीसम्प्रदाय के जनक= जोहन बी. वाटसन
=>अधिगम या व्यव्हार सिद्धांत के प्रतिपादक = क्लार्क
=>सामाजिक अधिगमसिद्धांत के प्रतिपादक= अल्बर्ट बाण्डूरा
=>पुनरावृत्ति का सिद्धांत= स्टेनले हॉल
=>अधिगम सोपानकी के प्रतिपादक= गेने
=>विकास के सामाजिक प्रवर्तक= एरिक्सन
=>प्रोजेक्ट प्रणाली से करके सीखना का सिद्धांत= जान ड्यूवी
=>अधिगम मनोविज्ञानका जनक= एविग हास
=>अधिगम अवस्थाओं के प्रतिपादक = जेरोम ब्रूनर
=>संरचनात्मक अधिगम का सिद्धांत = जेरोम ब्रूनर
=>सामान्यीकरण का सिद्धांत= सी. एच. जड
=>शक्तिमनोविज्ञान का जनक = वॉल्फ
=>अधिगम अंतरण का मूल्यों के अभिज्ञान का सिद्धांत= बगले
=>भाषा विकास का सिद्धांत= चोमस्की
=>माँग-पूर्ति(आवश्यकता पदानुक्रम) का सिद्धांत= मैस्लो (मास्लो)
=>स्व-यथार्थीकरण अभिप्रेरणा का सिद्धांत = मैस्लो (मास्लो)
=>आत्मज्ञान का सिद्धांत = मैस्लो (मास्लो)
=>उपलब्धि अभिप्रेरणा का सिद्धांत= डेविड सी.मेक्लिएंड
=>प्रोत्साहन का सिद्धांत= बोल्स व काफमैन
=>शील गुण(विशेषक) सिद्धांत के प्रतिपादक= आलपोर्ट
=>व्यक्तित्व मापन का माँग का सिद्धांत= हेनरी मुरे
=>कथानक बोध परीक्षणविधि के प्रतिपादक= मोर्गन व मुरे
=>प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण (T.A.T.) विधि के प्रतिपादक=मोर्गन व मुरे
=>बाल -अन्तर्बोध परीक्षण (C.A.T.) विधि के प्रतिपादक = लियोपोल्ड बेलाक

Child Development and Pedagogy : principles and their father's

Important CDP Questions for SUPERTET
IMPORTANT CDP Questions for CTET,KVS,UPTET

Child Development and Pedagogy - बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र

Child Development and Pedagogy for UPTET, SUPERTET, KVS, REET
बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र
प्रमुख सिद्धान्त
1. प्रयत्न एवं भूल का सिद्धान्त

अन्य नाम:- उद्दीपन अनुक्रिया सिद्धान्त, अधिगम का बंध सिद्धान्त, एसआर थ्योरी, संबंधवादी, व्यवहारवादी

प्रवर्तक:- एडवर्ड ली थार्नडाइक, अमेरिका
बिल्ली पर प्रयोग

यह सिद्धान्त अभ्यास द्वारा सीखने पर बल देता है। यह गणित और विज्ञान के लिए उपयोगी सिद्धान्त है। इसमें त्रुटियों का निराकरण पर बल दिया जाता है।

2. अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त

अन्य नाम:- प्राचीन अनुबंध का सिद्धान्त, शास्त्रीय अनुबंध का सिद्धान्त, संबंद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त, कंडीशनल रिस्पोंस थ्योरी

प्रवर्तक:- इवान पैट्रोविच, रूस
कुत्ता पर प्रयोग

यह सिद्धान्त कहता है कि आदतों का निर्माण कृत्रिम उद्दीपकों से संबंद्ध प्रतिक्रिया द्वारा होता है। इसी सिद्धान्त से सम्बद्ध प्रतिवर्त (सहज) विधि का जन्म हुआ। यह सिद्धांत भाषा विकास, मनोवृतियों का निर्माण, बुरी आदतों से छुटकारा पाना, सुलेख, अक्षर विन्यास जैसे विषयों में उपयोगी है। इस सिद्धांत के तहत छोटे बच्चों को वस्तुएं दिखाकर शब्दों का ज्ञान कराया जाता है।

3. अंतदृष्टि या सूझ का सिद्धान्त

अन्य नाम:- गेस्टाल्ट सिद्धान्त, संबंधवादी/व्यवहारवादी

प्रवर्तक:- वर्दिमिर, कोफ्का और कोहलर
वनमानुष सुल्तान चिंपांजी पर प्रयोग

यह सिद्धांत समस्या का हल स्वयं को ही खोजने के लिए प्रेरित करता है।



4 .क्रिया प्रसूत अनुबंध का सिद्धांत
 
अन्य नाम:- सक्रिय अनुबंध का सिद्धान्त, नैमित्तिक अनुबंध, संबंधवादी /व्यवहार वादी

प्रवर्तक:- ब्यूरहस फ्रेडरिक स्किनर
कबूतर, चूहा पर प्रयोग

यह सिद्धांत कहता है कि किसी को पुनर्बलन देकर अच्छे कार्य के लिए प्रेरित किया जा सकता है। यहां सही कार्य के लिए सकारात्मक और गलत कार्य के लिए नकारात्मक पुनर्बलन दिए जाने की बात कही गई है। पुनर्बलन का अर्थ होता है प्रेरक। यह पुरस्कार भी हो सकता है ओर दंड भी।


5.  प्रबलन का सिद्धान्त

अन्य नाम:- न्यूनतम आवश्यकता का सिद्धान्त, विधिक सिद्धान्त, संबंधवादी/व्यवहारवादी

प्रवर्तक:- सीएलहल

चूहा पर प्रयोग

इस सिद्धांत में व्यक्तिगत शिक्षा पर बल दिया गया है। सिद्धांत कहता है कि शिक्षक को विषयवस्तु तथा अधिगम को दोहराने पर बल देना चाहिए। इससे बालक की आदतों को बेहतर बनाया जा सकता है।



6. अनुकरण द्वारा अधिगम

प्रवर्तक:- हेगरटी

यह सिद्धांत कहता है कि अधिगम की प्रक्रिया अनुकरण द्वारा भी पूर्ण की जा सकती है। बच्चा जैसा देखता है वैसा ही करने का प्रयास करता है।


7. अधिगम का प्राकृतिक दशा सिद्धान्त

अन्य नाम:- क्षेत्र सिद्धान्त, तलरूप सिद्धान्त

प्रवर्तक:- कुर्टलेविन

यह सिद्धांत कहता है कि शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को उनकी योग्यता और शक्ति के अनुसार उपयुक्त मनोवैज्ञानिक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। साथ ही प्राप्त उद्देश्यों को प्रभावी तरीके से निर्देशित किया जाना चाहिए। इस सिद्धांत के तहत व्यवहार पर जोर देते हुए अभिप्रेरणा पर जोर दिया जाता है।



8. स्थानापन्न / प्रतिस्थापन या समीपता का सिद्धांत

प्रवर्तक:- एडविन गुथरी

यह सिद्धांत कहता है कि शिक्षक को उत्तेजना और अनुक्रिया के बीच अधिकतम साहचर्य स्थापित करना चाहिए ताकि अधिगम की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके।


9. अव्यक्त अधिगम

अन्य नाम:- चिह्न आकार अधिगम, चिह्न पूर्णाकारवाद संभावना सिद्धांत, प्रतीक अधिगम, अप्रकट अधिगम

प्रवर्तक:- एडवर्ड टोलमैन

चूहा पर प्रयोग

यह सिद्धांत कहता है कि सीखना संज्ञानात्मक मानचित्र बनाना है। साथ ही यह भी कहता है कि अध्यापक को चाहिए कि वह उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इनाम व दंड का प्रयोग करे। उद्देश्य प्राप्त करने का अर्थ है शिक्षा के  उद्देश्य प्राप्त करना। बच्चे को सिखाना। इसके लिए अध्यापक इनाम व दंड का प्रयोग कर सकता है।


10. अन्वेषण का सिद्धान्त

प्रवर्तक:- जेराम एस बू्रनर

यह सिद्धांत कहता है कि शिक्षक द्वारा बच्चों में अधिगम के प्रति रुझान पैदा करना चाहिए। इसके लिए विषय वस्तु को क्रमबद्ध रूप से प्रभावी तरीके से बच्चों के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।



11. शाब्दिक अधिगम का सिद्धान्त

अन्य नाम:-प्राप्त अधिगम का सिद्धांत

प्रवर्तक:- आसुबेल

यह सिद्धांत विषय वस्तु को विद्यालयी परिस्थितियों में प्रस्तुत करने पर जोर देता है और कॉलेज स्तर के लिए अनुकूल है।


12. अधिगम सोपानिकी सिद्धान्त

प्रवर्तक:- राबर्ट गेने

इस सिद्धांत के अनुसार अधिगम की क्षमताओं के आठ प्रतिमान माने गए हैं।
1 संकेत अधिगम
2 उद्दीपक-अनुक्रिया अधिगम
3 गत्यात्मक शृंखलन
4 शाब्दिक शृंखलन
5 अपवत्र्य विभेदन
6 सम्प्रत्यय अधिगम
7 अधिनियम अधिगम
8 समस्या समाधान
यह सिद्धांत कहता है कि अधिगम प्रभाव संचय होता है और अधिगम का हर प्रकार उत्तरोत्तर सरलतम से जटिलतम अधिगम तक सोपानवत जुड़ा हुआ है। यहां सरलतम से अर्थ संकेत अधिगम और जटिलतम से अर्थ है समस्या समाधान अधिगम।



13. सामाजिक अधिगम सिद्धांत

अन्य नाम:- प्रेक्षणात्मक अधिगम

प्रवर्तक:-अल्बर्ट बंडुरा

यह सिद्धांत कहता है कि व्यक्ति सामाजिक व्यवहारों का प्रेक्षण करता है और फिर वैसा ही व्यवहार करता है। जैसे हम टीवी पर फैशन शो या विज्ञापन देखकर यथावत व्यवहार का प्रयास करते है|

Child development and pedagogy for SUPERTET
Child development and pedagogy for UPTET
CHILD DEVELOPMENT AND PEDAGOGY FOR CTET



IMPORTANT SCIENCE QUESTIONS FOR UPTET, CTET, KVS, REET AND SUPER TET

Selected Science Questions for CTET, UPTET, KVS and SUPER TET Let's have a look at most important and selected questions of Scienc...